नन्ही बच्ची ने रोजा रख कर दे रहे हैं सब्र और जज्बे का इम्तिहान !
नन्ही बच्ची ने रोजा रख कर दे रहे हैं सब्र और जज्बे का इम्तिहान
तिल्दा नेवरा से ब्लॉक संवाददाता अमजद खान की रिपोर्ट
तिल्दा-नेवरा:--रोजेदारों के लिए रमजान का महीना काफी अहम होता है | माहे - ए - रमजान में नन्हे रोजेदार भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं | रमजान में बड़ों के साथ-साथ छोटे बच्चे भी रोजा रख कर खुद की इबादत में पीछे नहीं है | इस स्तर में तिल्दा नेवरा निवासी मासूम बच्ची जन्नत फातिमा खान 8 वर्ष भी रोजा रखकर खुद के आगे सस्ता कर रहीं हैँ 8 साल की मासूम बच्ची जन्नत फातिमा खान बताया कि सेहरी में उठाना बहुत अच्छा लगता है | और इफ्तार करना बहुत अच्छा लगता है | रब उन्हें हिम्मत और सब्र दे रहा है | भूख और प्यास बिल्कुल नहीं सता रहीं है |
रहमत और बरकत का महीना माह - ए - रमजान लोगों में इबादत के लिए जुनून पैदा करता है| इसीलिए बच्चे भी इबादत में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं | और उन्हें अल्लाह के नजदीक माना जाता है |
नन्हे रोजेदारों ने कहा कि वे रोजा रख कर देश में अमन चैन सुकून और देश की उन्नति एवं तरक्की व खुशहाली की दुआ कर रहे हैं |
इबादतो का पवित्र महीना माह - ए - रमजान में नन्हे रोजेदार भी भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं| रमजान के महीने में बड़ों के साथ-साथ छोटे बच्चे भी रोजा रख कर खुदा के इबादत में पीछे नहीं है |
रमजान में छोटे बच्चे भी रोजा रख इबादत कर रहे हैं | रब को राजी करने में बच्चे भी पीछे नहीं है | कई बच्चे ऐसे भी हैं जो सभी रोजा रख रहे हैं | रोजे में भूखे प्यासे रह कर रब की बारगाह में सजदा कर दुआ मांग रहे हैं |
बच्चों का जज्बा और सब्र देखकर बड़े भी कायल हो रहे हैँ | माह - ए - रमजान इस्लाम में खास माना जाता है| इसमें हर बालिग को रोजा रखना फर्ज है | लेकिन छोटे बच्चे भी रब को राजी करने के लिए पीछे नहीं है | वह भी पूरी कसरत के साथ इबादत में झूठे हैं | और रोजा रख रहे हैं|
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